Showing posts with label ख़ामी तुझी में है के ज़माना खराब है. Show all posts
Showing posts with label ख़ामी तुझी में है के ज़माना खराब है. Show all posts

Monday, April 22, 2013

ख़ामी तुझी में है के ज़माना खराब है




















ख़ामी तुझी में है के ज़माना खराब है
आखिर सभी को तुझसे ये क्यूं इज्तेनाब है

क्यंू ख़्वाहिशों को ज़ीस्त का उनवां बनाए हो
जब जानते हो ज़ीस्त मिसाले हबाब है

क्यूं उसकी कुरबतों से भला रोकते हैं लोग
वह मेरी जागती हुई आंखों का ख्वाब है

अंजाम उसका चाहे रसन हो के दार हो
फनकार है वही जो हकीकत निगार हो

बन जाए फिर तो एक तमाशा ये जि़न्दगी
इन्सां को जि़न्दगी पे अगर इखि़्तयार हो

किस जी से मुस्कुराएगा ’राही’ फिर आदमी
हर लम्हा-ए-हयात अगर दिल पे बार हो








कलाम- राशिद हुसैन ’राही’,
ऐमन जई, जलाल नगर, शाहजहांपुर उ.प्र. 242001
मेबाइल नं. 09369536775